पश्चिम बंगाल की राजनीति में अचानक हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। उनका आरोप है कि राज्य में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हो रही है और सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा।
सूत्रों के मुताबिक, Senior Advocate कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि चुनाव आयोग अपने ही आदेशों को नजरअंदाज कर रहा है। उनका कहना है कि “Logical Discrepancy” के नाम पर असली मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं और इससे लोगों का वोट देने का अधिकार सीधे प्रभावित होगा।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इस कदम के पीछे मतदाता सूची में बदलाव के जरिए चुनावी खेल को रोकने की ममता बनर्जी की रणनीति है। SIR प्रक्रिया के दौरान कई जगहों पर मतदाताओं की पारदर्शिता और अधिकारों को लेकर शिकायतें भी सामने आई हैं।

💥 पूरा मामला:
ममता बनर्जी ने पिछले कुछ हफ्तों में चुनाव आयोग को कई पत्र लिखकर सुधार की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका (WP(C) No. 129/2026) दायर कर दी, जिसमें चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के Chief Electoral Officer को प्रतिवादी बनाया गया है। अब अदालत यह तय करेगी कि क्या SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता है, मतदाता अधिकार सुरक्षित हैं या नहीं, और क्या चुनाव आयोग ने अपने कर्तव्यों का पालन किया।
इस मामले से पूरे देश की नजरें पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं, और आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट का फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
“अब सवाल सिर्फ प्रक्रिया का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों का है – सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा कि वोटर का अधिकार सुरक्षित रहेगा या राजनीतिक खेल की भेंट चढ़ जाएगा।”