
सुबह का वक्त है। खेतों में हल चल रहा है, मिट्टी से उठती सोंधी खुशबू हवा में घुली हुई है। इसी माहौल में एक किसान अपनी रोज़ की मेहनत में जुटा है। उसके घर में न तो बड़ी लाइब्रेरी है, न महंगी कोचिंग की बातें, और न ही किसी बड़े शहर का शोर।लेकिन इसी साधारण से घर में एक ऐसा सपना पल रहा था, जो देश की सबसे कठिन परीक्षा से जुड़ा था।
गांव के स्कूल से पढ़ाई, सीमित संसाधन और जिम्मेदारियों से भरा माहौल — हालात आसान नहीं थे। जब ज्यादातर छात्र दिल्ली और कोटा की कोचिंग क्लासों में बैठकर UPSC की तैयारी कर रहे थे, तब यहां पढ़ाई होती थी मोबाइल, पुरानी किताबों और इंटरनेट के सहारे।दिन में खेतों की ज़िम्मेदारी, और रात को किताबों के साथ संघर्ष।
कई बार थकान हावी हुई, कई बार मन में सवाल आया — क्या बिना कोचिंग सच में मुमकिन है?लेकिन हर बार एक ही सोच जीत गई — मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।
और फिर वो दिन आया, जब UPSC का रिजल्ट जारी हुआ।लिस्ट में एक नाम ऐसा था, जिसने पूरे गांव को रोककर देखने पर मजबूर कर दिया।
राजस्थान के एक किसान की बेटी कोमल पुनिया ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल कर ली।न कोचिंग, न बड़े खर्च — सिर्फ सेल्फ स्टडी, अनुशासन और मजबूत इरादा।
खेतों से शुरू हुआ यह सफर अब कलेक्टर बनने की दहलीज तक पहुंच चुका है।कोमल पुनिया की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक सीधा संदेश है —अगर हौसला मजबूत हो, तो हालात रास्ता खुद बना देते हैं।