बसपा के लिए 2027 का चुनाव सियासी वजूद को बचाए रखने का है , लेकिन दूसरे दालों के नेताओं की बसपा में इनकमिंग हो नहीं रही है और आउटगोइंग लगातार जारी है मायावती के राजनीतिक पॉलिसी से 2027 में बसपा का क्या होगा ?
उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा की सियासी जमीन दिन-ब-दिन सिकुड़ती जा रही है 2027 के चुनाव को लेकर माहौल गर्म है , एक तरफ बसपा की हाथी पर कोई बड़ा नेता सवार होने के लिए तैयार नहीं है लेकिन दूसरी तरफ मायावती एक के बाद एक अपने नेता को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा रही है , मायावती की इस पॉलिसी से बसपा का 2027 में क्या होगा?
बसपा प्रमख मायावती ने पिछले हफ्ते कई बड़े नेताओं को पार्टी से बाहर कर दिया, बसपा के वरिष्ठनेता जयप्रकाश सिंह पूर्व विधायक धर्मवीर सिंह अशोक , युवा नेता सरफराज राईन और उनके उपकार बावरा को अलग-अलग तारीख में पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
मायावती ने इन चारों को बसपा से निकालने की एक ही वजह बताई इन सभी नेताओं के निष्कासन लिए बसपा प्रमख की तरफ से जो पत्र लिए गए हैं उसमें बताया की पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त और अनुशासनहीनता के कारण करवाई पार्टी से निष्कासित किया गया है, बसपा से जिसे भी निकाला जाता है उसके लिए यह शब्द लिखे जाते हैं, बस नाम बदल जाते हैं?

मायावती अपनी अलग राजनीतिक शैली के लिए जानी जाती है । यह स्टाइल न सिर्फ उनके करीबी बल्कि कई बार उनके विरोधियों तक को हैरान करती है मायावती जब चाहती है बसपा में किसी को फर्श से उठाकर अर्श पर बैठा देती हैं तो और जब चाहती है अर्श से फर्श पर ल देती है मायावती कब किस बात पर नाराज हो जाए ये बात कोई नहीं जनता ।
मायावती की इस अलग स्टाइल का शिकार उनकी पार्टी के का ए दिग्गज हो चुके हैं और इस फेहरिस्त में एक के बाद एक नाम जुड़ता जा रहा है , इससे पहले मायावती ने अपने करीबी समसुद्दीन राइन के साथ यही सलूक किया। शमसुद्दीन को पार्टी से इसलिए निष्कासित कर दिया था की वो मायावती का फोन नहीं उठा सके थे।
मायावती की पॉलिसी से बसपा हाशिए पर पहुंची
मायावती का अपनी रजनीति करने का अपना तौर तरीका है बसपा में मायावती के लिए कभी कोई नेता जरूरी नहीं रहा उनकी इसी राजनीतिक शैली के चलते ही बसपा सियासी हाशिए पर पहुंच गई है , काशीराम के साथ मिलकर बसपा का गठन करने वालों पर भी रहम नहीं किया, मायावती ने एक के बाद एक एक्शन ऐसे समय ले रही हैं जब बसपा अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है।
2012 से यूपी की सत्ता से दूर है और 2027 का चुनाव मायावती के लिए काफी अहम माना जा रहा है। 2027 का चुनाव बसपा के सियासी वजूद को बचाए रखने का है , जिसके लिए फिलहाल मायावती को एक एक तिनके को जोड़ने की जरूरत है , ऐसे में पार्टी के साथ नए नेताओं को जोड़ने के बजाए अपने ही नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा रही है , ऐसे में मायावती के एक्शन 2027 की रह में मुश्किल खड़ी न कर दे।