केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में मोदी सरकार का लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। इस बजट से आम लोगों और टैक्सपेयर्स को आयकर में राहत की उम्मीद थी, लेकिन इनकम टैक्स स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। बजट भाषण के दौरान ही शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला और निवेशकों की निराशा साफ नजर आई।

बजट आते ही बाजार फिसला
बजट पेश होने के बाद सेंसेक्स करीब 600 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी 250 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बाजार को टैक्स में राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकार का फोकस सुधारों और दीर्घकालिक विकास पर रहने से शॉर्ट टर्म में निवेशकों का मूड बिगड़ गया।
तीन ‘कर्तव्यों’ पर आधारित रहा बजट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में बताया कि बजट 2026 तीन प्रमुख कर्तव्यों (Duties) से प्रेरित है—
- देश की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना
- लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना
- हर परिवार, क्षेत्र और समुदाय तक विकास का लाभ पहुंचाना
सरकार का कहना है कि इन तीन स्तंभों के जरिए भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत और टिकाऊ बनाया जाएगा।
बजट 2026 की अहम घोषणाएं
- पूंजीगत व्यय (Capex) में बढ़ोतरी, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा
- डेटा सेंटर्स के लिए टैक्स छूट, जिससे डिजिटल इंडिया और टेक सेक्टर को मजबूती
- कुछ कैंसर की जरूरी दवाओं को सस्ता करने का प्रस्ताव
- दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों के उत्पादन पर विशेष ध्यान
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च और इनोवेशन में निवेश बढ़ाने की बात
प्रधानमंत्री मोदी का बयान
बजट सत्र के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह बजट
“अपार अवसरों का राजमार्ग है, जो विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का फोकस केवल आज पर नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की मजबूत नींव रखने पर है।
आम आदमी को क्या मिला?
जहां एक तरफ सरकार ने सुधारों और भविष्य की योजनाओं पर जोर दिया, वहीं मिडिल क्लास और सैलरीड टैक्सपेयर्स को तुरंत कोई बड़ी राहत नहीं मिली। यही वजह रही कि बजट के तुरंत बाद बाजार में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट का असर लॉन्ग टर्म में पॉजिटिव हो सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और हेल्थ सेक्टर से जुड़े फैसले आने वाले समय में ग्रोथ को सपोर्ट कर सकते हैं। हालांकि, बाजार की चाल अब इस बात पर निर्भर करेगी कि बजट के प्रावधानों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है।