तराई का क्षेत्र बिलासपुर अब केवल गेहूं धान की फसल उगने तक सीमित नहीं रहा । यहां के जागरूक किसान पारंपरिक खेती के उत्तर औषधि गुना से भरपूर शतावर की उपज ले रहे हैं तो कहानी खेतों में एवोकाडो जैसी कुछ मूल्य वाली फसल लहरा रही है । इन फसलों के जरिए किसान अधिक मुनाफ कमा रही है। उच्च शिक्षित नौकरी के बजाय खेती में नवाचार के जरिए बेहतर मुनाफ कमा रहे हैं।
जौहर अली यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पुरी करने के बाद गांव पजावा निवासी फरमान ने नौकरी के बजाय खेती में ही कुछ नया करने की ठनी। इसके लिए उन्होंने नेपाल में ₹5000 प्रतिकलोग्राम में बिकने वाला नेपाली शतावर का बीज ले आए। पहले उन्होंने दोएकड़ भूमि में शतावर की फसल उगाई।

डेढ़ साल में फसल तैयार हई। इसे बाजार में बेचकर उन्होंने मोटा मुनाफा कमाया। प्रयोग सफल होने पर उन्होंने अगली बार भी शतावर उगने का फैसला लिया। इस बार उन्होंने शतावर के पौधों से ही बीज मिल गया। जिसको उन्होंने करीब तीन एकड़ भूमि में उगाया। इस बार यह फसल उनके लिए बड़ा मुनाफा लेकर आई।
शतावर की आयुर्वेदिक और फार्मास्यूटिकल्स कंपनियां में भारी मांग रहती है। इसलिए इसे सफेद सोना भी कहा जाता है। अब वह एक एकड़ से 5 लाख से 8 लाख तक का मुनाफा कमा रहे हैं। इसी तरह गांव पिपलिया मिश्र निवासी किसान हरदीप सिंह ने भी खेती में नवाचार किया है । लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में उन्होंने एवोकाडो की खेती शुरू की है।
एवोकाडो जिसे मक्खन फल भी कहा जाता है की खेती से अच्छा मुनाफ कमा रहे हैं। कभी केवल बड़े शहरों के मॉल दिखने वाला यह फल अब बिलासपुर के खेतों की शान बढ़ा रहा है । किसान हरदीप सिंह ने बताया कि सुपरफूड के रूप मशहूर एवोकाडो की कीमत डेढ़ सौ से₹300 प्रतिकलो तक होती है ।
इससे वह बढ़िया मुनाफ कमा रहे हैं। में उन्नत सील किसानों को देख कर अन्य किसान भी अपने खेतों में नवाचार को आगे बढ़ाने को आतुर होते नजर आने लगे है हरदीप बताते हैं कि कई किसान उनके एवोकाडो की फसल उगने के बारे जानकारी लेने जा रहे है।