भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे युद्ध को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार इस संकट का भारत पर असर कम करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने विपक्षी दल Indian National Congress पर आरोप लगाया कि उनके कुछ बयान विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।

केरल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत सरकार हर स्तर पर सक्रिय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि खाड़ी देशों (Gulf countries) में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह के गैर-जिम्मेदार बयान उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति से बचें।
पश्चिम एशिया भारत के लिए तेल और गैस का प्रमुख स्रोत है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिससे ईंधन की कीमतों और उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। पीएम ने कहा कि सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आंतरिक संसाधनों का उपयोग कर रही है।

वहीं, Indian National Congress ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए इसे असफल बताया। पार्टी का कहना है कि मौजूदा हालात सरकार की कूटनीतिक रणनीति की कमजोरी को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे कठिन समय में सामूहिक प्रयास ही देश को सुरक्षित और मजबूत बनाए रख सकता है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने लोगों से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने चीनी और तेल के सेवन में कमी लाने और योग व फिटनेस अपनाने पर जोर दिया।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ रही है और भारत को आर्थिक व सामाजिक दोनों मोर्चों पर सतर्क रहने की जरूरत है।