Heinrich Klaasen ने एक बार फिर Sunrisers Hyderabad के लिए जिम्मेदारी निभाई, लेकिन इस बार उनकी पारी वैसी नहीं थी जैसी फैंस उनसे उम्मीद करते हैं। स्कोरकार्ड में उनका अर्धशतक अच्छा दिखता है, पर मैदान पर उनकी बल्लेबाज़ी थोड़ी धीमी और संघर्षभरी नजर आई।
क्लासेन ने पारी को संभालने का काम तो बखूबी किया, लेकिन उनके शॉट्स में वो आत्मविश्वास और फ्लो नहीं दिखा। जहां पहले वह आसानी से गेंद को बाउंड्री के पार भेज देते थे, इस मैच में उन्हें रन बनाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ी। सिर्फ एक छक्का लगना भी इसी बात का संकेत है कि उनका पुराना अंदाज़ थोड़ा कम दिख रहा है।
मैच के दौरान उन्होंने कुछ जोखिम भरे शॉट्स भी खेले, जैसे रिवर्स स्कूप, जो कभी कामयाब हुआ तो कभी लगभग विकेट गंवा देते। इससे साफ है कि वह अभी भी अपने गेम को लेकर एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं, लेकिन टाइमिंग पहले जैसी सटीक नहीं बैठ रही।

इसका एक बड़ा कारण उनका लगातार मैच न खेलना भी हो सकता है। इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी और अलग-अलग लीग्स में अनियमित खेल ने उनकी लय को थोड़ा प्रभावित किया है।
इसके बावजूद, उनकी अहमियत टीम के लिए कम नहीं हुई है। Sunrisers Hyderabad के मिडिल ऑर्डर में अनुभव की कमी है, और ऐसे में क्लासेन ही वो खिलाड़ी हैं जो पारी को संभाल सकते हैं और मैच का रुख बदल सकते हैं।
आने वाले मैचों में अगर क्लासेन अपनी पुरानी फॉर्म में लौटते हैं, तो टीम के लिए बड़ी राहत होगी। फिलहाल उन्होंने काम तो कर दिया, लेकिन उनका बेस्ट अभी आना बाकी है।